Tribute to Rajju Bhaiya

प्रो राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) स्‍मृति सेवा न्यास, प्रयागराज, उ.प्र. भारत की प्रस्तुति

“हमारे समाज पर हुए निरंतर आघातों के बाद भी हम जीवित हैं उसका मूल कारण हमारी समाज रचना ही है , जो आज भी विश्व को शांति का मार्ग बताने में समर्थ है। युद्ध ना हो विश्व में शांति हो सब लोग सुखी हो परस्पर वैमनस्य ना हो यह हमारी संस्कृति की कल्पना है। ‘ सर्वे भवंतु सुखिना’ हमारे पूर्वजों ने ही कहा और उसे आचरण में भी उतार कर दिखाया। हमारे में अभी भी मनुष्य को विकसित करने का सामर्थ्य है आवश्यकता इस बात की है कि प्रत्येक के अंतः करण में इसकी विशिष्टता का साक्षात्कार हो। “

-रज्जू भैया

जीवन परिचय

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The complete swayamsewak

I first met Rajendra Singh, or Rajju Bhaiyya, in February 1961. I was studying at Benaras Hindu University, and as a student leader I had invited him to a function we had organised.

He was the final word for the Parivar

Rajju Bhaiyya -- former Rashtriya Swayamsevak Sangh sarsanghchalak Professor Rajendra Singh, who died on Monday -- was a soft-spoken, affable person.

man of wisdome

प्रो॰ राजेन्द्र सिंह (२९ जनवरी १९२२[1] - १४ जुलाई २००३) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चौथे सरसंघचालक थे, जिन्हें सर्वसाधारण जन से लेकर संघ परिवार तक सभी जगह रज्जू भैया के नाम से ही जाना जाता है। वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में १९३९ से १९४३ तक विद्यार्थी रहे। तत्पश्चात् १९४३ से १९६७ तक भौतिकी विभाग में पहले प्रवक्ता नियुक्त हुए, फिर प्राध्यापक और अन्त में विभागाध्यक्ष हो गये। रज्जू भैया भारत के महान गणितज्ञ हरीशचन्द्र के बी०एससी० और एम०एससी० (भौतिक शास्त्र) में सहपाठी थे।

Views and Videos

Glimpse of Rajju bhaiya’s Life and Views of other Eminent about Rajju Bhaiya Ji

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